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नान दफ्तर में ईओडब्ल्यू का छापा, एसआईटी ने फाइलों को खंगाला

रायपुर। नान घोटाले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने जांच तेज करते हुए शुक्रवार को नान दफ्तर में छापा मारा है। आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) एसपी एवं विशेष जांच टीम (एसआईटी) अफसर आईके ऐलेसेला ने आज अपनी टीम के साथ अवंति विहार स्थित नान मुख्यालय में दबिश दी। एसआईटी के अधिकारियों ने कई पुराने दस्तावेजों को खंगालने के साथ ही कंप्यूटरों के कुछ पुराने हार्ड डिस्क को भी देखा। इस मामले की जांच ईओडब्ल्यू आईजी एसआरपी कल्लूरी के नेतृत्व में एसआईटी कर रही है। सूत्रों का कहना है, एसआईटी ने 2011 से लेकर 2014 तक की फाइलों को देखा। इससे पहले ईओडब्ल्यू ने जो जांच की थी, उसमें सि घोटाले के दौरान हुई लेनेदेन पर ही पूरा फोकस रहा। पता चला है कि एसआईटी नान से जुड़े रहे भारतीय वन सेवा के एक अफसर की भूमिका को भी समझने का प्रयास कर रही है। सूत्रों के अनुसार वन मुख्यालय में बैठे एक बड़े आईएफएस अफसर को नान घोटाले का मास्टरमाइंड माना जाता है। उस अफसर की पोस्टिंग के बाद ही नान में कमीशनखोरी का खेल चालू हुआ था।

एसआईटी अगर नान की पुरानी कड़ियों को जोड़ने में कामयाब हो गई तो यकीनन, उसका पहला शिकार आईएफएस अफसर बनेंगे। हालांकि आईएफएस के अलावा एक आईएएस का नाम भी डायरी में है। आईएएस का प्लेन के टिकिट के साथ ही मोबाइल चार्ज, सिगरेट से लेकर घरेलू उपयोग की सारी चीजें नान ऑफिस के पैसे से भिजवाई जाती थी। वैसे, नान मामले में आईएएस डाॅ. आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा पहले से अभियुक्त हैं। दोनों को मिलाकर ईओडब्ल्यू ने 16 आरोपितों के खिलाफ चालान पेश किया है। मगर ईओडब्ल्यू के चालान में बताते हैं कि 110 लोगों के नाम हैं। चालान पेश करते समय ईओडब्ल्यू ने कोर्ट में कहा था कि घोटाले में ये नाम भी हैं, लेकिन इनके खिलाफ जांच में कोई साक्ष्य नहीं मिल सका। इसलिए उनके खिलाफ मामला तय नहीं किया गया। बताते हैं कि तीन आईएएस के खिलाफ मंत्रालय के कई अफसरों को भी नान से हर महीने लिफाफे जाते थे। उनका नाम भी डायरी में है। एसआईटी की जांच में ये सभी अफसर नपेंगे।

उल्लेखनीय है कि जब्त डायरी के पन्नों में सीएम मैडम, सीएम सर के नाम आने के बाद सियासत सालों से गरमाई हुई है। आरोप है कि छत्तीसगढ़ में राइस मिलरों से लाखों क्विंटल घटिया चावल लिया गया और इसके बदले करोड़ों रुपये की रिश्वतखोरी की गई। इसी तरह नागरिक आपूर्ति निगम के ट्रांसपोर्टेशन में भी भारी घोटाला किया गया। इस मामले में 27 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। जिनमें से 16 के खिलाफ 15 जून 2015 को अभियोग पत्र पेश किया गया था। वहीं इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय की ओर से केस दर्ज कर जांच किया जा रहा है। ईओडब्ल्यू एसपी एलेसेला ने बताया कि जो हमें टास्क नान मामले को लेकर मिला है उसी के तहत नान के ऑफिस पहुचे थे। 2011 से लेकर 2014 के बीच जो भ्रष्टाचार हुआ था उसकी जांच चल रही है। कुछ दस्तावेज मिसिंग हैं, उन्ही को खंगालने की कवायद जारी है।

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