मध्प्रदेश

सामने से आ रही थी सिकंदराबााद एक्सप्रेस, डाली छोड़कर भागे रेलकर्मी, हादसा टला

जबलपुर. पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर रेल मंडल अंतर्गत जबलपुर-इटारसी रेलखंड के पिपरिया रेलवे स्टेशन के समीप गाड़ी संख्या 12792 दानापुर-सिकंदराबाद एक्सप्रेस उस समय हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गई, जब ट्रेक पर काम कर रहे रेल कर्मचारी अचानक डाली को ट्रेक पर ही छोड़कर सामने से आती ट्रेन को देख भाग खड़े हुए, इस घटना में ट्रेन के इंजिन में डाली फंस गई, जो कई मीटर तक घिसटती रही, चालक की सतर्कता से हादसा टल सका. यह घटना शनिवार 2 फरवरी की सुबह घटित हुई.

घटना के संबंध में बताया जाता है कि शनिवार की सुबह 8.45 बजे पिपरिया रेलवे स्टेशन के पास किलोमीटर नंबर 812/15-17 से ट्रेन क्रमांक 12792 दानापुर-सिकंदराबाद एक्सपे्रस अप लाईन से गुजर रही थी, इस लाईन पर यूनिट नंबर 8 के गैंगकर्मी पटरी पर डाली लेकर फाटक क्रमांक 236 पर जा रहे थे, तभी उनकी नजर सामने से तेज रफतार से आ रही दानापुर एक्सपे्रस पर पड़ी. जान बचाने के लिये गैंगकर्मियों ने डाली को पटरी पर छोड़ा और भाग गये, जिससे उक्त ट्रेन का इंजन डाली से जा टकराया और इंजिन के केटल गार्ड में फंसकर डाली 100 मीटर से ज्यादा घिसटती गई. बताया जाता है कि जैसे ही डाली को ट्रेक पर छोड़कर भागते रेल कर्मचारी दिखे, वैसे ही ट्रेन के चालक ने सतर्कता बरतते हुए इमरजेंसी ब्रेक का उपयोग करते हुए गाड़ी की गति धीमी कर दी. माना जा रहा है कि यदि ट्रेन अपनी पूरी गति से डाली से टकराती तो बड़ा हादसा हो सकता था. इस घटना के बाद इंजिन में फंसी ट्रॉली निकालने में रेलकर्मियों को काफी मशक्कत के बाद लगभग 25 मिनट के बाद निकाला जा सका, इस दौरान ट्रेन मैन ट्रेक पर ही खड़ी रही, यात्री दहशत में रहे. इस घटना की जानकारी पमरे के जिम्मेदार अधिकारियों को दे दी गई है.

यह होती है है डाली

बताया जाता है कि पटरी पर काम करने वाले रेलकर्मियों को समान लाने-ले जाने के लिये तीन प्रकार के साधन होते है. पहली ट्रॉली, जिसमें बैठकर रेल अधिकारी निरीक्षण करते हैं, यह चार चके की होती है. इसके लिये ब्लाक लिया जाना जरूरी है. दूसरी डिपलरी, यह दो चके की होती है, जिसे दोनों पटरी पर रखा जाता है और उससे भारी समान ढोया जाता है, इसके लिये भी ब्लाक का प्रावधान है. तीसरी है डाली, इसमें दो चके एक के पीछे एक लगे होते हैं, इसे एक ही पटरी पर चलाकर रेलकर्मी भारी समान लाते-ले जाते हैं. खास बात यह है कि उक्त तीनों साधनों के उपयोग पर मुकद्दम, पीडब्ल्यूआई, पीवे सुपरवाईजर साथ रहने का प्रावधान किया गया है. दानापुर एक्सपे्रस के समय डाली का उपयोग करते समय एक भी जिम्मेदार नहीं थे.

 

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