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रिजर्व बैंक ने आम जनता को दिया यह बड़ा तोहफा, सस्ता हुआ कर्ज लेना

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आम जनता को अंतरिम बजट पेश होने के बाद पहली मौद्रिक समीक्षा नीति का एलान करते हुए बड़ा तोहफा दे दिया है. भारतीय रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में तीन तक चली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग के बाद रेपो रेट में 0.25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर दी है. jअब रेपो रेट 6.25 प्रतिशत व रिवर्स रेपो रेट 6 प्रतिशत हो गया है.

कर्ज लेना होगा सस्ता

आरबीआई के इस कदम से आम जनता को कर्ज लेना सस्ता पड़ेगा. इससे सभी तरह के कर्ज लेना शामिल हैं. 28 जनवरी को सरकारी बैंकों के साथ मीटिंग में शक्तिकांत दास ने इस बात के इशारा दिए थे .

मीटिंग के बाद आर्थिक जगत ने उम्मीद जताई है कि मुद्रास्फीति में नरमी को देखते हुए रिजर्व बैंक आगामी मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दरों में कटौती कर सकता है . इससे पहले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति दर बीते दिसंबर में घटकर 2.19 प्रतिशत पर आ गई है, जो कि डेढ़ वर्ष का न्यूनतम स्तर है .

बैंकों को पीसीए से निकालना प्राथकिता

एनपीए के बोझ तले दबे सरकारी बैंकों पर आर्थिक संकट गहराता जा रहा है . भारतीय रिजर्व बैंक ने 11 सरकारी बैंकों को त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) के तहत रखा था जिन पर नए कर्ज बांटने व शाखाएं खोलने पर रोक लगा दी गई थी .

गवर्नमेंट व भारतीय रिजर्व बैंक की प्राथमिकता है कि इन बैंकों को जल्द से जल्द पीसीए से बाहर निकाला जाए . इसके लिए बैंकिंग एरिया में सुधारों के साथ गवर्नमेंट संकट में फंसे बैंकों को पूंजी भी उपलब्ध करा रही है व उम्मीद है कि जल्द चार-पांच बैंक पीसीए फ्रेमवर्क से बाहर आ जाएं .

महंगाई पर मिली राहत

थोक व महंगाई के हालिया आंकड़े देखने के बाद एमपीसी अपने रुख में परिवर्तन कर सकती है . खुदरा महंगाई दिसंबर में 18 माह के निचले स्तर 2.19 प्रतिशत व थोक महंगाई आठ माह के निचले स्तर 3.80 प्रतिशत पर पहुंच गई है .

यह लगातार पांचवां महीना था जब खुदरा महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमानित लक्ष्य 4 प्रतिशत से नीचे रही है . रिपोर्ट में बोला गया कि 7 फरवरी को एमपीसी की चालू वित्त साल में छठी मीटिंग होनी है, जो नीतिगत ब्याज दरों पर निर्णय करते समय खुदरा महंगाई को ध्यान में रखती है .

खुदरा कर्ज बढ़ने से मजबूत होगी अर्थव्यवस्था

देश के अधिकांश सरकारी बैंकों पर बढ़ते एनपीए के बोझ व बैड लोन के कारण बैंकिंग तंत्र बहुत ज्यादा समय से कठिन में है . विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दर में गिरावट से खुदरा कर्ज लेना सस्ता हो जाएगा व इसमें इजाफे से राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सकती है .

बैंकों का बढ़ रहा भरोसा

औद्योगिक व कारोबारी लोन के बड़ी मात्रा में एनपीए होने के कारण बैंकों का रुझान खुदरा कर्ज देने की ओर बढ़ रहा है . क्रेडिट ब्यूरो सहित अन्य सुधारवादी कदमों के बाद उनका भरोसा खुदरा कर्जदारों में मजबूत हुआ है .

साल 2013 में जहां बैंकों के कुल कर्ज में खुदरा कर्ज का भाग 18.3 प्रतिशत था, वहीं मार्च,2018 में यह 24.8 प्रतिशत हो गया . इसके बाद अक्तूबर के हालिया आंकड़ों में यह भाग 25.5 प्रतिशत पहुंच गया है .

आधे से ज्यादा खुदरा कर्ज

देश के तीन सबसे बड़े बैंकों के आंकड़ों को देखें तो उनके कुल कर्ज में से आधे से ज्यादा भाग खुदरा कर्ज का है . एसबीआई, एचडीएफसी बैंक व आईसीआईसीआई बैंक के लोन बुक में खुदरा कर्ज की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से ज्यादा है . इसी तरह, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक के लोन बुक में भी खुदरा कर्ज की हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत है .

बैंकों को पीसीए से निकालना प्राथकिता

एनपीए के बोझ तले दबे सरकारी बैंकों पर आर्थिक संकट गहराता जा रहा है . भारतीय रिजर्व बैंक ने 11 सरकारी बैंकों को त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) के तहत रखा था जिन पर नए कर्ज बांटने व शाखाएं खोलने पर रोक लगा दी गई थी .

महंगाई पर मिली राहत

थोक व महंगाई के हालिया आंकड़े देखने के बाद एमपीसी अपने रुख में परिवर्तन कर सकती है . खुदरा महंगाई दिसंबर में 18 माह के निचले स्तर 2.19 प्रतिशत व थोक महंगाई आठ माह के निचले स्तर 3.80 प्रतिशत पर पहुंच गई है .

खुदरा कर्ज बढ़ने से मजबूत होगी अर्थव्यवस्था

बैंकों का बढ़ रहा भरोसा

औद्योगिक व कारोबारी लोन के बड़ी मात्रा में एनपीए होने के कारण बैंकों का रुझान खुदरा कर्ज देने की ओर बढ़ रहा है . क्रेडिट ब्यूरो सहित अन्य सुधारवादी कदमों के बाद उनका भरोसा खुदरा कर्जदारों में मजबूत हुआ है .

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