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बिजली केे लौटे बुरे दिन, शहर से लेकर गांव तक बत्ती गुल

गुना। वक्त है बदलाव का, विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेसियों द्वारा गला फटने की हद तक लगाए गए इस नारे का असली मतलब लोगों को अब समझ आ रहा है। कम से कम इन दिनों बिजली की स्थिति देखकर तो लोग यहीं मतलब निकाल रहे है कि वाकई वक्त बदलाव का आ गया है। दरअसल भाजपा सरकार में अपवाद छोडक़र चौबिसों घंटे घर द्वार को रोशन करने वाली बिजली रानी सत्ता परिवर्तन के कुछ समय बाद से ही परेशान करने लगीं है। पिछले कुछ समय में तो बिजली के हालात जिले में काफी खराब रुप में सामने आ रहे है। चौराहे से लेकर चौपाल तक और शहर से लेकर गांव तक इन दिनों बत्ती गुल बनी हुई है।

हालांकि बिजली विभाग की तरफ से घोषित कटौती शुरु नहीं हुई है, किन्तु जब-तब बिजली गुल हो रही है। कभी घंटों के लिए तो कभी 5-10 मिनट के लिए। जब भरी सर्दी में बिजली के यह हाल है तो गर्मी में क्या होगा? इस आशंका से ही लोग कांप रहे है, दूसरी ओर कटौती को लेकर बिजली विभाग के अधिकारी भी कोई संतुष्टिजनक जवाब नहीं दे पा रहे है। न बारिश, न आंधी फिर भी गुल हो रही बत्ती शहर में बिजली ने हालत खराब कर रहे है। न तो बारिश होती है और न आंधी चलती है, फिर भी बिजली गुल हो जाती है। कभी घंटों के लिए बिजली चली जाती है तो कभी 2-5 मिनट में ही आ जाती है। दिन भर में एक से डेढ़ दर्जन बार बिजली ट्रिप मारती है। दिन के साथ ही रात में भी यह स्थिति बनी रहती है। सोमवार को ही दिन भर में कम से कम 12 बार बिजली ने ट्रिप मारी, वहीं दो बार 1-1 घंटे के लिए गायब रही।

इससे पहले रविवार की रात करीब 2 घंटे तक आधे से ज्यादा शहर अंधेरे के हवाले रहा, तो कई क्षेत्रों में इससे भी ज्यादा समय के लिए बिजली गुल रही। कुछ क्षेत्र ऐसे रहे, जहां बिजली आधे घंटे या 15 मिनट में आ गई थी। यह एक, दो दिन की बात नहीं है, बल्कि पिछले हफ्ते-15 दिन से यहीं स्थिति बनी हुई है। शहर की स्थिति तो फिर भी ठीक है, किन्तु तहसील और ग्रामीण क्षेत्र में हालात और भी ज्यादा खराब है। आरोन, बीनागंज, चांचौड़ा, रुठियाई, राघौगढ़ में घंटों की कटौती हो रही है। बिजली में लौटे पुराने दिन गुना में बिजली के पुराने बुरे दिन लौट आए है। इसे देखते हुए लोग अब अतिरिक्त इंतजाम में जुट गए है। इसके चलते जहां इनवर्टरों की मांग बढ़ गई है तो लोग इन्हे सुधरवाने भी लगे है। गौरतलब है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में होने वाले बेहतहाशा बिजली कटौती के चलते अधिकांश घरों में इनवर्टर लग गए थे, बाद में भाजपा शासन में बिजली के सुधरे हालातों के कारण जहां इनवर्टर की मांग लगभग खत्म हो गई थी तो खराब होने पर लोगों ने इनवर्टर सुधरवाने और बैटरी बदलवाने की जरुरत महसूस नहीं की थी, किन्तु पिछले 15 दिन से बिजली के हालातों को देखते हुए लोग अतिरिक्त इंतजामों के भरोसे होने लगे है।

इसके चलते इनवर्टरों एवं बैटरी की दुकानों पर रौनक लौट आई है। बैटरी संचालक मनीष गुप्ता ने बताया कि पिछले तीन साल में जितनी बैटरी उनकी दुकान से नहीं बिकी थीं, उतनी पिछले सात दिन में बिक चुकीं है, इसके साथ ही इनवर्टर भी लोग खरीद रहे है। हम चक्की वालों का दर्द कौन समझेगा? नाम राधेश्याम यादव, व्यवसाय चक्की चलाकर गेहूँ पीसना। राधेश्याम बार-बार बिजली गुल होने से परेशान है। दुखी मन से कहते है कि हम चक्की वालों का दर्द कौन समझेगा। 20 किलो गेहूँ की एक पल्ली पीसने में एक से दो घंटे का समय लग रहा है। इस दौरान कई बार बिजली गुल हो जाती है। इससे चक्की भी खराब हो रही है। कुछ ऐसी ही पीड़ा बैल्डिंग कर्मीं मुकेश जाटव की है। मुकेश का कहना है कि कोई काम ही नहीं कर पा रहे है। बैल्डिंग शुरु करते है और बत्ती गुल हो जाती है, फिर थोड़ी देर काम होता है और बिजली चली जाती है। साईकल की दुकान चलाने वाले अविनाश वर्मा का कहना है कि बिजली गुल रहने से हवा भरने का इंतजाम नहीं हो पाता है तो पंचन जोडऩे में भी परेशानी आ रही है। बिजली की ऑख-मिचौली दिन भर चलती रहती है। कुछ ऐसी ही तकलीफ बिजली व्यवसाय से जुड़े अन्य लोगों की है।

उनका कहना है कि काम धंधे बुरी तरह प्रभावित हो रहे है। अगर यहीं स्थिति रहती है तो पेट भरना भी मुश्किल हो जाएगा। क्या कहते है लोग बिजली ने इन दिनों हालत खराब कर रखी है। जो बिजली भाजपा सरकार में पलक भी नहीं झपकाती थी, वहीं बिजली अब दिन भर आँख-मिचौली खेलती रहती है। बार-बार बिजली जाने से मशीन खराब हो रही है तो काम भी नहीं हो पा रहा है। मुकेश जाटव बैल्डिंग कर्मीं बिजली गुल रहने तो न तो पानी भर पाता है और न अंधेरे में पति और बच्चों के लिए नाश्ता तैयार हो पाता है।सोमवार को ही सुबह 6 से 7.30 तक चार बार बिजली गुल हुई। इसके बाद जो गई तो सीधी 9 बजे आई। क्या हो रहा है पता नहीं? सरोज जैन गृहिणी जो इनवर्टर कबाड़ में रख छोड़ा था, उसे निकालकर झाड़-पोंछकर तैयार कर लिया है। दुकान पर सुधरवाने और बैटरी के लिए डालकर आया हूँ। सर्दी में बिजली के यह हाल है तो गर्मी में क्या होगा? समझा जा सकता है। आदत नहीं रही, इसलिए परेशानी ज्यादा हो रही है।

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